वन जिवविविधता प्रभाग
पृष्ठभूमि
वन संसाधन किसी भी समाज के लिए बहुत महत्वपूर्ण संसाधन है जिसका सतत उपयोग समाज को बेहतर जीविका की संभावनाएँ प्रदान करने के लिए किया जाना जरूरी है। वनों की उत्पादकता को उचित विकास और उपज के अध्ययन के माध्यम से बेहतर बनाया जा सकता है। वनों की उपज को बेहतर प्रबंधन के तरीकों से बढ़ाया जा सकता है। वन प्रबंधन का केंद्रीय विषय वर्धमान संग्रहके स्तर,काष्ठ फसल और पेड़ विकास के बीच जटिल अन्योन्य क्रिया का विश्लेषणहै।
वन जीवसांख्यिकी; मात्रात्मक समस्याओं के विश्लेषण,मात्रात्मक प्रबंधन उपकरणों के विकास और सांख्यिकीय तरीकों के प्रयोग से संबंधित वन और पारिस्थितिकी तंत्र विज्ञान के अंतर्गत अध्ययन का एक क्षेत्र है। वन जैवविविधता में (i) आंकड़ों के संग्रह प्रक्रिया जिसमें माप और क्षेत्रमिति, रिमोट सेंसिंग, प्रयोगों, वृक्ष या वन आकड़े या डाटा से संबंधित प्रक्रियाओं के संग्रह के लिए नमूने और सूची तथा वनों एवं वृक्षों की आबादी शामिल है और (ii) वन आंकड़ा का विश्लेषण, संक्षेपन और व्याख्या करने के लिए सांख्यिकीय पद्धति का प्रयोग शामिल है।
वन बयोमेट्रिक्स, वन और संबंधित विज्ञान के अंतर्गत सबसे मौलिक विषयों में से एक है। यह पेड़ और स्टैंड्स और परिणामी जानकारी के विश्लेषण से संबंधित है। वन बयोमेट्री वन प्रबंधन पद्धति में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। वन अनुसंधान के लिए वनों के डेनसिटि, विविधता, स्टैंड्स के अंदर पेड़ों की स्थानिक वितरण, स्टैंड्स के अंदर पेड़ों की स्थानिक आकार के वितरण और पेड़ तथा स्टैंड्स की संभावित वृद्धि के बारे में जानकारी की आवश्यकता होती है।
वनों की सही योजना के लिए, प्रबंधन की बदलती परिस्तिथियि में अलग अलग प्रजतियों के विकि को जानना आवश्यक है ।विकास का आकलन वन प्रबंधन में एक आवश्यक कदम है । भविष्यि में होनेवाली वृद्धि शमिल होती है। सतत वन प्रबंधन में,किसी वन के मौजूदा स्टॉक के न केवल ज्ञान बल्कि भविष्य में होने वाली पैदावार की उम्मीद भी शामिल है।

लक्ष्य/अधिदेश
• वन मापन और मूल्यांकन, और पेड़ों की मॉडलिंग और वन प्रबंधन के लिए एक उपकरण के रूप में स्टैंड विकास।

महत्वपूर्ण क्षेत्रों
• वन क्षेत्रमिति, जैवसांख्यिकी और विकास एवं उपज मॉडलिंग

उद्देश्य
• प्राकृतिक और लगाए वनों में वर्धन एवं उपज / उत्पादकता का अध्ययन
• महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के लिए मात्रा और उपज समीकरणों की रचना
• कर्नाटक में उगाए गए महत्वपूर्ण वृक्ष प्रजातियों के लिए वृद्धि और उपज मॉडल का विकास
• वृक्षों की वृद्धि और वनों की उत्पादकता पर लंबी अवधि के पर्यावरण परिवर्तन के प्रभावों का अध्ययन
• वृद्धि मॉडलिंग के लिए वन अवलोकन अध्ययन, नेटवर्क की स्थापना और पारिस्थितिकी तंत्र संरचना, गतिशीलता और परिवर्तन का अध्ययन और विश्लेषण।

अनुसंधान की मुख्य विशेषताएं
कर्नाटक में सागौन (टीक) बागानों के लिए कुल विक्रेय (वेरिबयल टॉप डयामीटर एवं वेरिबयल बोल लेंथ) मात्रा समीकरणों को विकसित किया गया है । कुछ अन्यय मॉडल, सागौन (टीक) की मात्रा का आकलन करने के लिए लिखित में उपलब्ध है, जिनका परीक्षण किया गया लेकिन आम तौर पर उनकी सघनता (डीबीएच > 23 सेमी) से कम आंका गया । विकसित किए गए मात्रा समीकरण छोटे पेडों और अधिक सघन स्टैंडस में प्रति हेक्टर 1000 से कम सघनता वाले बागानों की अपेक्षा, बडे पेडौं (डीबीएच > 15 सेमी, कुलप ऊंचाई > 12 मी) पर अधिक सटिक है, फिर भी छोटे पेडों और अधि सघन बागानों के मामलों में अनुमान त्रुटियां स्वीकार्य सीमा के अंदर ही थे, सामान्य ज्यामितीय बेलन मात्रा समीकरणों के साथ 0.40 की एक स्टेम फॉर्म फौक्टर, विकसित मॉडल की अपेक्षा कम सटीक (17 से कम करके आं कित मात्रा) थे और इसलिए बेलन मात्रा समीकरण का उपयोग करते हुए मात्रा आकलन के लिए कम से कम 0.45 की एक फार्म फैक्टर की इस्तेमाल किया जाना है ।
सागौन (टीक) बगानों में हार्ट वूड, सैप वूड और छाल सामग्री का भी अनुमान लगाया गया था। कर्नाटक में सागौन (टीक) बगानों में डीबीएच की वृद्धि के साथ हार्ट वूड मात्रा बढ़ जाती है। इसके अलावा, छाल सामग्री उम्र और डीबीएच की वृद्धि के साथ कम हो जाती है, लेकिन स्टैंड सघनता के साथ बढ़ जाती है।

अविरत परियोजना:
कर्नाटक में सागौन (टीक) के सतत प्रबंधन के लिए उनके वन-बगानों पर उपज और वृद्धि अध्ययन

सुविधाएं

पवार चेन सॉ

इंक्रीमेंट बोरर

डिजिटेक प्रोफेशनल कैलिपर

इलेक्ट्रोनिक क्लिनोमीटर

वर्टेक्स लेजर वीएल 402

बर्क गेज



अनुसंधान कर्मचारी
1. श्री एम. श्रीनिवास राव, आईएफएस,मुख्य वन संरक्षक एवं प्रभाग प्रधान
2. डॉ बी.एन. दिवाकर, वैज्ञानिक-ई

अधिक जानकारी के लिएकृपया संपर्क करें:
प्रधान
वन जीवमिति प्रभाग
काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान
पोस्ट- मल्लेश्वरम
बेंगलुरू-560 003 (भारत)
ई-मेल: raoms@icfre.org
टेलीफोन: + 91-80-22190158
 
   
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