विस्तार समर्थन सेल
पृष्ठभूमि
काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान, बेंगलूर; भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद के संस्थानों में से एक है,जिसे अपनी प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण के लिए मुख्य अधिदेश प्राप्त है, क्योंकि इस संस्थान द्वारा विभिन्न तकनीकों का विकास किया गया है। इन प्रौद्योगिकियों / तकनीकों को शोध पेपर्स, सेमिनारों / कार्यशालाओं / सम्मेलनों, मीडिया और व्यक्तिगत संपर्क के माध्यम से प्रचार किया जाता है । हालांकि, उपयोगकर्ताओं के साथ बेहतर संबंधों के अभाव में, शोध के परिणामों का प्रभाव अधीष्टतम रहा है। वास्तव में, राज्य वन विभागों के साथ संपर्क, विश्व बैंक द्वारा वित्त पोषितवानिकी अनुसंधान, शिक्षा और प्रसार परियोजनाकी शुरुआत जैसे शोध परिणामों के प्रसार के लिए पहले कुछ प्रयास किए गए थे और सन् 1994-95 में भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद में एक बहुत आवश्यक प्रसार निदेशालय अस्तित्व में आया।

लक्ष्य
राज्य वन विभागों, विश्वविद्यालयों, गैर सरकारी संगठनों, सार्वजनिक क्षेत्र आदि के साथ अनुसंधान अनुबंधों की स्थापना
आईसीएफआरई प्रौद्योगिकियों का प्रसार
अंतिम उपयोगकर्ताओं के बीच ऑडियो-वीडियो, क्षेत्रीय भाषाओं में सामग्री के प्रकाशन, कार्यशालाओं / सम्मेलन / संगोष्ठी / प्रशिक्षण / वीवीके / डेमो गांव के माध्यम से जागरूकता पैदा करना ।


महत्वपूर्ण क्षेत्र
वानिकी के प्रसार के लिए संस्थान के महत्वपूर्ण क्षेत्र निम्न प्रकार हैं:
• प्रदर्शन कार्यक्रमों का आयोजन
• मास मीडिया के माध्यम से बड़े पैमाने पर जागरूकता अभियान।
• किसानों / जनजातीय समूहोंआदिको प्रशिक्षण
• आईसीएफआरई संस्थान द्वारा विकसित वानिकी और पर्यावरण आधारित प्रौद्योगिकियों का प्रसार करने के लिए हितधारकों के साथ बैठक ।

अनुसंधान की मुख्य विशेषताएं
काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान के प्रसार विंग, बेंगलूर को साहित्य, वीडियो फिल्मों,प्रदर्शन कार्यक्रमों आदि जैसे प्रसार सामग्री की तैयारी में विशेषज्ञता प्राप्त है । आईडब्ल्यूएसटी के प्रसार विंग, बेंगलूर द्वारा अंतिम उपयोगकर्ताओं के लाभ के लिए 25 ब्रोशर 10 पांम्पलेटस निकाले गए हैं और विभिन्न विषयों पर 7 वीडियो फिल्में तैयार की गईं हैं। प्रसार कर्मचारी अंतिम उपयोगकर्ताओं को ध्यान में रखते हुए प्रसार सामग्री के डिजाइन तैयार करने में अब सक्षम हो गए हैं। इस संस्थानने वन विभाग, कृषि विश्वविद्यालयों और अन्य संगठनों के साथअनुबंधों कोविकसित औरमजबूत बनाया है जो अंतिम उपयोगकर्ताओं को सूचना के प्रसार में उपयोगी होगा।
वर्तमान मेंअपनाए गए प्रसार के तरीके हैं -क्षेत्र में प्रदर्शन,प्रसार माध्यमों जैसे फिल्में, वीडियो, ब्रोशर, विज्ञप्ति पत्रक और कार्यशालाओं, संगोष्ठियों और सम्मेलनों के माध्यम से प्रदर्शनी और व्यक्तिगत संपर्क । कार्यप्रणाली का चुनाव प्रौद्योगिकी की प्रकृति और ग्राहक समूह पर निर्भर करता है।
1. स्कूलों, कॉलेजों और विश्वविद्यालयों, वन रेंजर्स प्रशिक्षण महाविद्यालय, राज्य वन सेवा कॉलेज संस्थान के छात्रोंने संस्थान की गतिविधियों के साथ खुद को परिचित करने के लिए संस्थान का दौरा किया है।
2. प्रेस बैठक के लिए व्यवस्था और सामग्री प्रदान की गई।
3. कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा में वन विज्ञान केंद्र की स्थापना और तदनुसार मॉडल गांव स्थापित करने के लिए गांव को गोद लेने के संबंध में किसानों के साथ नियमित बैठकें आयोजित की गईं। किसानों को गुणवत्ता अंकुर और बीज वितरित किया जाएगा।
4. वानिकी और काष्ठ विज्ञान से संबंधित विषयों पर कार्यशालाएं/सेमिनार का आयोजन
5. आंध्रप्रदेश, कर्नाटक और गोवा में वानिकी और काष्ठ विज्ञान प्रौद्योगिकी का प्रदर्शन।
6. प्रचार सामग्री का प्रकाशन


चलाए जा रहे कार्यक्रम
प्रसार रणनीतियों और अनुसंधान प्रसार संबंधों के विकास का निरूपण।
(क) तकनीकी सहायता प्रदान करने और (ख) जनता में जागरूकता पैदा करने के लिएकार्यक्रम
1. प्रौद्योगिकी का प्रसार
2. फिल्म निर्माण
3. प्रसार मुद्रण
4. प्रसार सामाग्री की आपूर्ति
5. तकनीकी बुलेटिन
6. प्रदर्शनी / संगोष्ठी
7. प्रसार सहायता कोष

वन विज्ञान केंद्र
कर्नाटक, आंध्रप्रदेश और गोवा जैसे राज्यों में संस्थान के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत वन विज्ञान केंद्र की स्थापना की गई है । संस्थान के प्रसार अधिकारी इसके नोडल अधिकारी हैं ।

काडुगोडी–वन तकनीकी और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान, बेंगलूर, कर्नाटक
नोडल अधिकारी का नाम:
उप वन संरक्षक(प्रशिक्षण)
वन तकनीकी और प्रशासनिक प्रशिक्षण संस्थान
व्हाइटफील्ड, कडुगोडी
बेंगलूर

डूलपल्ली - वन अनुसंधान केंद्र, आंध्रप्रदेश वन अनुभाग , हैदराबाद, आंध्रप्रदेश
नोडल अधिकारी का नाम:
मुख्य वन संरक्षक (आर)
आंध्रप्रदेश वन अनुभाग
हैदराबाद


सतपाल - गोवा
नोडल अधिकारी का नाम:
उप वन संरक्षक
अनुसंधान और उपयोगिता प्रभाग
मडगांव - गोवा

अधिदेश :
• किसानों सहित विभिन्न उपयोगकर्ता समूहों के लिए तकनीकी ज्ञान का प्रसार
• अनुसंधान निष्कर्षों के आधार परउपयुक्त प्रौद्योगिकियों के तकनीकी जानकारी का उपयोग करने के लिए उपयोगकर्ता समूहों की मदद/ सहायता करना
कार्य:
• विविकेस् के लिए आधारभूत संरचना जैसे भवन, फिक्सचर, बिजली और पानी की आपूर्ति, नर्सरी, प्रदर्शन और प्रयोजनों आदि के लिए भूमि आदि प्राप्त करने के लिए राज्य वन विभागों के साथ संपर्क करना ।
• ज्ञान, कौशल और प्रौद्योगिकियों के उपयुक्त साहित्य के साथ विविकेस् को लैस करना।
• राज्य वन विभागों के प्रसार कर्मियों के क्षमता निर्माण और उनके प्रसार तंत्र को मजबूत बनाना भविष्य में विविकेस् के लिए कार्मिकों की व्यवस्था।
यह संस्थान कुछ मानकीकृत प्रौद्योगिकियों के हस्तांतरण हेतु काष्ठ विज्ञान और वानिकी से संबंधित विषयों पर लोगों को शिक्षित करने के लिए लघु अवधि प्रशिक्षण पाठ्यक्रम आयोजित करता है। यह प्रयास न केवल लाभार्थियों को मदद करता है, बल्कि यह चलाए जा रहे प्रशिक्षण हेतु संस्थान के लिए राजस्व भी सृजित करता है। वर्ष 2007-08 के दौरान आठ प्रशिक्षण कार्यक्रमों का आयोजन किया गया और विभिन्न संगठनों के कुल 57 लाभार्थियों ने इसमें भाग लिया।

प्रकाशन
ब्रोशर
तकनीकी बुलेटिन

कर्मचारी
1. डॉ. पंकज कुमार अग्रवाल, वैज्ञानिक 'जी' एवं प्रभारी
2. डॉ. आशुतोष श्रीवास्तव, वैज्ञानिक-ई
3. श्री रितेश कुमार डी. राम, वैज्ञानिक-ई
4. श्रीमती एम. सुजाता मठद, सहायक पुस्तकाध्यक्ष
5. श्री आर. नागराज, अनुसंधान सहायक, ग्रेड- I

अन्य प्रभागों के सहयोगी
1. श्री एन.सी.एम. राजन, वैज्ञानिक डी
2. श्री जी. रवि कुमार, अनुसंधान सहायक चयन ग्रेड-I
3. श्री के. टी. चंद्रशेखर, अनुसंधान अधिकारी ग्रेड-I
4. डॉ पी. वी. सोमशेखर, अनुसंधान अधिकारी ग्रेड-I
5. श्री एन. चंद्रशेखर, अनुसंधान अधिकारी ग्रेड-I

अधिक जानकारी के लिएकृपया संपर्क करें:
विस्तार अधिकारी
विस्तार समर्थन सेल
काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान
पोस्ट- मल्लेश्वरम
बेंगलुरू-560 003 (भारत)
ई-मेल: extension_iwst@icfre.org
टेलीफोन: + 080-22190107


   
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