निदेशक का संदेश
“वुड इज गुड” अर्थात “काष्ठ है श्रेष्ठ”। काष्ठ एक प्राकृतिक वस्तु है और इसमें काफी विविधता है । भारत में 4000 से ज्यादा प्रकार के काष्ठ पाये जाते है । अन्य प्राकृतिक संसाधनों के विपरीत, काष्ठ रीन्यूवेबल है और बहुत सारे मानवनिर्मित पदार्थों जैसे प्लास्टिक के विपरीत बयोडिग्रेडेबल भी है और हां, यह कार्बन को बांधती है, इसके स्वरुप को बदलने के लिए बहुत कम ऊर्जा की आवश्यकता होती है साथ ही, औद्योगीकरण के लिए बहुत उपयुक्त संसाधन है काष्ठ । ये सभी गुण लकडी को वर्तमान दुनिया में उपलब्ध पदार्थो में सबसे गौरवमय स्थान प्रदान करते है । काष्ठ विज्ञान और प्रौद्योगिकी संस्थान (आई.डब्ल्यू.एस.टी.) गर्व से इस अद्भुत पदार्थ, काष्ठ को बढावा देने के लिए प्रयासरत है।

मैसूर के महाराजा श्री कृष्णराज वोडेयार, चतुर्थ, जिनको महात्मा गांधी द्वारा ‘एक राजा और एक संत’ कहा गया, की दूरदर्शिता से 1938 में ‘वन अनुसंधान प्रयोगशाला’ का जन्म हुआ, जो पांच दशक बाद वर्तमान में आई.डब्ल्यू.एस.टी. के नाम से जाना जाता है। इसका परिसर 25 एकड में फैला है जोकि बेंगलौर की हरी भरी जगहों में से एक है ।
यह संस्थान वैज्ञानिक प्रगति एवं वानिकी और काष्ठ विज्ञान के क्षेत्र में तकनीकी संवर्द्धन लाने के लिए समर्पित है ।
इस संस्थान को चंदन अनुसंधान और काष्ठ विज्ञान की उत्कृष्टता केन्द्र (सेंटर ऑफ एक्सलेन्स) के रुप में मान्यता प्राप्त है । मैं इस संस्थान की वेबसाइट पर आपका स्वागत करता हूँ जिसने हाल ही में अपनी प्लेटिनम जुबली मनाई है ।
सुरेन्द्र कुमार, भावसे
निदेशक
 
   
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